अरावली पर्वतमाला: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास
ENVIRONMENT
Apoorva Chaturvedi - from Mainpuri
12/29/20251 min read
परिचय
अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संरचनाओं में से एक है। इसकी पर्यावरणीय अहमियत को देखते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर–दिसंबर 2025 में महत्वपूर्ण आदेश पारित किए, जिनका उद्देश्य अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं को अनियंत्रित खनन और पर्यावरणीय नुकसान से बचाना है।
ये आदेश पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। इस समिति में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के प्रतिनिधि तथा विभिन्न तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि अरावली पर्वतमाला:
मरुस्थलीकरण को रोकती है
भूजल रिचार्ज में मदद करती है
जैव विविधता को सहारा देती है
दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण की रक्षा करती है
अरावली पर्वतमाला का महत्व
अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह दिल्ली से गुजरात तक, हरियाणा और राजस्थान होते हुए फैली हुई है और 37 से अधिक जिलों को कवर करती है।
अरावली के मुख्य पर्यावरणीय कार्य:
थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकना
भूजल स्तर को बनाए रखना
जंगल, वन्यजीव और जैव विविधता की रक्षा
वायु गुणवत्ता और जलवायु संतुलन बनाए रखना
मिट्टी कटाव और बाढ़ को रोकना
सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि अरावली में अनियंत्रित खनन पूरे देश की पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति और उसके निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूरे अरावली क्षेत्र के लिए यह तय किया जाए कि अरावली पहाड़ी और अरावली पर्वतमाला की परिभाषा क्या होगी, ताकि खनन को सही तरीके से नियंत्रित किया जा सके।
समिति के मुख्य निष्कर्ष:
पहले केवल राजस्थान में अरावली की स्पष्ट परिभाषा थी
राजस्थान ने 2006 से वैज्ञानिक आधार पर खनन पर रोक लगाई हुई है
यह परिभाषा उन पहाड़ियों पर लागू थी जो अपने आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊँची हैं
समिति की बैठक में सभी राज्यों ने सहमति दी कि यही 100 मीटर का मानक पूरे अरावली क्षेत्र में लागू किया जाए।
यह स्पष्ट किया गया कि 100 मीटर से कम ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भी हर जगह खनन की अनुमति नहीं है। पहाड़ियों की ढलान, तलहटी और आसपास के भू-आकृतियों को भी संरक्षण मिलेगा।
और अधिक मजबूत व वैज्ञानिक परिभाषा
समिति ने पुरानी परिभाषा को और बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए:
मुख्य सुधार:
पहाड़ी की ऊँचाई मापने के लिए स्पष्ट वैज्ञानिक तरीका
केवल पहाड़ियों ही नहीं, बल्कि पूरी पर्वतमालाओं का संरक्षण
सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शों पर अरावली को चिन्हित करना
कोर / इनवायलेट क्षेत्र तय करना, जहाँ खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा
अवैध खनन रोकने के लिए सख्त नियम
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 के आदेश में इन सभी सिफारिशों को स्वीकार किया।
अरावली पहाड़ी क्या है? (सरल शब्दों में)
कोई भी भू-भाग:
जो अरावली जिलों में स्थित हो
जो आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊँचा हो
उसे अरावली पहाड़ी माना जाएगा।
इसमें क्या-क्या शामिल होगा?
पहाड़ी की चोटी
ढलान
तलहटी और जुड़े हुए भू-भाग
इससे पूरी प्राकृतिक इकाई सुरक्षित रहती है।
अरावली पर्वतमाला (Range) क्या है?
जब:
दो या उससे अधिक अरावली पहाड़ियाँ
500 मीटर के भीतर स्थित हों
तो उनके बीच का पूरा क्षेत्र अरावली पर्वतमाला माना जाएगा।
इसमें शामिल होगा:
घाटियाँ
छोटे टीले
ढलान
वन्यजीवों के रास्ते
ये परिभाषाएँ क्यों जरूरी हैं?
ये सिर्फ तकनीकी नियम नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा के मजबूत औज़ार हैं।
इनसे:
पानी रिचार्ज होने वाले क्षेत्रों की रक्षा होती है
जंगल और जीव-जंतुओं का आवास सुरक्षित रहता है
अवैध खनन पर रोक लगती है
सरकारी एजेंसियों को कार्रवाई में स्पष्टता मिलती है
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश (20 नवंबर 2025)
सुप्रीम कोर्ट ने निम्न निर्देश दिए:
अरावली की नई परिभाषा को मंजूरी
कोर क्षेत्रों में खनन पर पूरी रोक
केवल परमाणु, रणनीतिक और अत्यंत आवश्यक खनिजों को सीमित छूट
सतत खनन योजना (MPSM) बनाने का आदेश
MPSM बनने तक नए खनन पट्टों पर रोक
मौजूदा खदानों को भी सख्त नियमों का पालन करना होगा
MPSM क्या है?
Management Plan for Sustainable Mining (MPSM):
गुजरात से दिल्ली तक पूरी अरावली के लिए बनेगा
बताएगा कि कहाँ खनन बिल्कुल नहीं होगा
कहाँ सीमित और नियंत्रित खनन हो सकता है
पर्यावरणीय क्षमता का आकलन करेगा
खनन के बाद जमीन बहाली को अनिवार्य बनाएगा
जहाँ खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है
टाइगर रिज़र्व
वन्यजीव अभयारण्य
ईको-सेंसिटिव ज़ोन
संरक्षित क्षेत्रों से 1 किमी तक
आर्द्रभूमि (Wetlands) से 500 मीटर तक
CAMPA से बने जंगल
बिना अनुमति के वन भूमि
मौजूदा खदानों के लिए सख्त नियम
पर्यावरण स्वीकृति अनिवार्य
वन स्वीकृति जरूरी
भूजल संरक्षण के नियम
नियमित निरीक्षण
नियम तोड़ने पर खदान बंद हो सकती है
अवैध खनन रोकने के उपाय
ड्रोन और CCTV कैमरे
इलेक्ट्रॉनिक चालान और वज़न मशीनें
जिला स्तर पर टास्क फोर्स
शिकायत के लिए कंट्रोल रूम
अवैध खदान तुरंत सील
निष्कर्ष
अरावली पर्वतमाला आज मजबूत कानूनी और वैज्ञानिक संरक्षण में है। यह कहना गलत है कि अरावली तत्काल खतरे में है।
सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से:
पर्यावरण सुरक्षित है
खनन पर सख्त नियंत्रण है
विकास और संरक्षण में संतुलन बनाया गया है
अरावली हमारी राष्ट्रीय धरोहर है—और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
संदर्भ
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
अरावली पहाड़ियों की समान परिभाषा पर समिति रिपोर्टसुप्रीम कोर्ट आदेश (20 नवंबर 2025)
https://api.sci.gov.in/supremecourt/1995/2997/2997_1995_1_1502_66178_Order_20-Nov-2025.pdf
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